कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति । अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मणः पथि ॥ ३८ ॥
kachchin nobhaya-vibhraṣhṭaśh chhinnābhram iva naśhyati apratiṣhṭho mahā-bāho vimūḍho brahmaṇaḥ pathi
हिंदी अर्थ
हे महाबाहो! क्या वह भगवत्प्राप्ति के मार्ग में मोहित और आश्रय-रहित पुरुष छिन्न-भिन्न बादल की भाँति दोनों ओर से भ्रष्ट होकर नष्ट तो नहीं हो जाता?
भावार्थ
हवा से छिन्न-भिन्न हुए बादल का चित्र — जो न एक समूह का रहा, न दूसरे का — अर्जुन के भय को दर्शाता है: सांसारिक लक्ष्य छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया, और उसमें भी विफल हुए, तो क्या हाथ कुछ नहीं बचा?