ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः । लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा ॥ १० ॥
brahmaṇyādhāya karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā karoti yaḥ lipyate na sa pāpena padma-patram ivāmbhasā
हिंदी अर्थ
जो पुरुष सब कर्मों को परमात्मा में अर्पित करके और आसक्ति त्यागकर कर्म करता है, वह जल से कमल के पत्ते की भाँति पाप से लिप्त नहीं होता।
भावार्थ
कमल के पत्ते का प्रसिद्ध चित्र। कमल जल में उगता है और उसके पत्ते जल पर टिके रहते हैं, फिर भी पानी बिना भिगोए लुढ़क जाता है। वैसे ही भक्त संसार में पूरी तरह रहता है, फिर भी उसकी मलिनता उससे चिपकती नहीं।