यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः । ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ॥ १९ ॥
yasya sarve samārambhāḥ kāma-saṅkalpa-varjitāḥ jñānāgni-dagdha-karmāṇaṁ tam āhuḥ paṇḍitaṁ budhāḥ
हिंदी अर्थ
जिसके सभी कर्म कामना और संकल्प से रहित हैं, तथा जिसके सब कर्म ज्ञान रूपी अग्नि द्वारा भस्म हो गए हैं, उसे ज्ञानीजन पंडित कहते हैं।
भावार्थ
"ज्ञानाग्नि" का चित्र पहली बार आता है। आत्मा के सत्य की समझ भूत और वर्तमान कर्मों की बंधनकारी शक्ति को जला देती है, जैसे अग्नि बीजों को जला दे ताकि वे अंकुरित न हो सकें।