कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः । अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः ॥ १७ ॥
karmaṇo hyapi boddhavyaṁ boddhavyaṁ cha vikarmaṇaḥ akarmaṇaśh cha boddhavyaṁ gahanā karmaṇo gatiḥ
हिंदी अर्थ
कर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए, विकर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए, और अकर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए; क्योंकि कर्म की गति गहन है।
भावार्थ
तीन श्रेणियाँ: कर्म (उचित कर्म), विकर्म (गलत या निषिद्ध कर्म), और अकर्म (जो कर्म बाँधता नहीं)। "गहना कर्मणो गतिः" — कर्म की गति गहन है — नैतिक जीवन की जटिलता के लिए एक कहावत बन गया है।