इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते । एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम् ॥ ४० ॥
indriyāṇi mano buddhir asyādhiṣhṭhānam uchyate etair vimohayatyeṣha jñānam āvṛitya dehinam
हिंदी अर्थ
इंद्रियाँ, मन और बुद्धि — ये इस काम के निवास-स्थान कहे जाते हैं। यह इनके द्वारा ज्ञान को ढककर जीवात्मा को मोहित करता है।
भावार्थ
एक कुशल रणनीतिकार की तरह, श्रीकृष्ण बताते हैं कि शत्रु कहाँ डेरा डाले है: इंद्रियों में, मन में, और बुद्धि में भी, जो हमारी कामनाओं को तर्कसंगत ठहरा सकती है। इसके छिपने के स्थानों को जानना इस पर विजय का पहला कदम है।