Bhakti ArohanBhakti Arohan

भगवद्गीता — अध्याय 3, श्लोक 24

उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम् । सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः ॥ २४ ॥

utsīdeyur ime lokā na kuryāṁ karma ched aham sankarasya cha kartā syām upahanyām imāḥ prajāḥ

हिंदी अर्थ

यदि मैं कर्म न करूँ तो ये सब लोक नष्ट हो जाएँ, और मैं अव्यवस्था (संकरता) का कारण बनूँ तथा इस सारी प्रजा का नाश करने वाला बनूँ।

भावार्थ

संसार की व्यवस्था स्वयं ईश्वर के निरंतर कर्म पर निर्भर है। श्रीकृष्ण अर्जुन की सामाजिक अव्यवस्था (संकर, 1.41–42) की चिंता को दोहराते हैं, पर उसे उलट देते हैं: अव्यवस्था कर्तव्य छोड़ने से आती है, उसे करने से नहीं।

भगवद्गीता अध्याय 3.24 | Bhakti Arohan