यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान् । कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे ॥ २२ ॥
yāvadetān nirīkṣhe ’haṁ yoddhu-kāmān avasthitān kairmayā saha yoddhavyam asmin raṇa-samudyame
हिंदी अर्थ
ताकि मैं यहाँ युद्ध की इच्छा से खड़े इन योद्धाओं को देख सकूँ, और जान सकूँ कि इस रण में मुझे किन-किन से लड़ना है।
भावार्थ
अर्जुन का निवेदन व्यावहारिक है: सेनापति शत्रु का निरीक्षण करना चाहता है। उन्हें अभी पता नहीं कि वह दृष्टि उनके साथ क्या करने वाली है। स्पष्ट देखने की इसी छोटी-सी, उचित इच्छा पर पूरी गीता का मोड़ टिका है।