अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः । प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥ २० ॥
atha vyavasthitān dṛiṣhṭvā dhārtarāṣhṭrān kapi-dhwajaḥ pravṛitte śhastra-sampāte dhanurudyamya pāṇḍavaḥ
हिंदी अर्थ
तब धृतराष्ट्र के पुत्रों को व्यूह में खड़ा देखकर, जब शस्त्र चलने ही वाले थे, कपिध्वज (जिसकी ध्वजा पर हनुमान विराजमान हैं) पाण्डुपुत्र अर्जुन ने अपना धनुष उठाया,
भावार्थ
अर्जुन को यहाँ "कपिध्वज" कहा गया है — जिसकी ध्वजा पर वानर अर्थात हनुमान विराजमान हैं; परंपरा के अनुसार हनुमान ने अर्जुन की ध्वजा पर रहने का वचन दिया था। इस क्षण अर्जुन पूरी तरह योद्धा हैं, धनुष उठाए, युद्ध आरंभ करने को तैयार। इसी कारण आगे आने वाला उनका टूटना और भी मार्मिक लगता है।