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ॐ

माँ काली पूजा विधिघर पर सरल पूजन और काली पूजा की रात

घर पर माँ काली की शांत, सात्त्विक पूजा: अमावस्या, मंगलवार-शनिवार, नवरात्रि की सातवीं रात और काली पूजा की रात। सामग्री, पूजा का क्रम, मंत्र, चालीसा, स्तोत्र और आरती, और क्या दीक्षित उपासना के लिए छोड़ें।

उन्हें माँ के रूप में पूजें

काली का रूप उग्र है, पर घर की उपासना में उनके पास ठीक वैसे ही जाया जाता है जैसे माँ के किसी भी रूप के पास: स्वच्छता, दीपक, फूल और शांत, विश्वास भरे मन के साथ। उनकी तांत्रिक उपासना, अपने विशेष मंत्रों, समय और भेंटों के साथ, योग्य गुरु से दीक्षा के बाद ही होती है। यह विधि वह सरल, सात्त्विक गृह-पूजा है जिसे कोई भी कर सकता है।

कब करें

  • काली पूजा (श्यामा पूजा): कार्तिक अमावस्या, दीपावली की रात, बंगाल, असम और ओडिशा में। पूजा रात्रि (निशीथ काल) में होती है।
  • नवरात्रि: सातवीं रात, जो कालरात्रि को समर्पित है।
  • हर मास की अमावस्या।
  • नियमित पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार, प्रायः संध्या के बाद।

पूजा सामग्री

  • माँ काली (दक्षिणा काली) का चित्र, या काली का चित्र न हो तो दुर्गा का
  • चित्र को विराजमान करने के लिए लाल कपड़ा
  • सरसों के तेल या घी का दीपक, धूप और कपूर
  • लाल गुड़हल (जवा), उनका प्रिय फूल, या अन्य लाल फूल
  • कुमकुम, सिंदूर, अक्षत
  • एक नारियल, फल और कोई सादी मिठाई; बंगाल में मिठाई और खिचड़ी का भोग सामान्य है
  • रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला

क्रमवार विधि

  1. तैयारी। स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें (काली के लिए लाल या काले वस्त्र पारंपरिक हैं), और पूजा स्थान साफ़ करें। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
  2. पहले गणेश। गणेश जी को एक फूल चढ़ाएँ ताकि पूजा निर्विघ्न हो।
  3. संकल्प। दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम और उद्देश्य बोलें: रक्षा, साहस, भय से मुक्ति, या बस भक्ति। जल छोड़ दें।
  4. स्थापना और आवाहन। चित्र को लाल कपड़े पर विराजमान करें, थोड़ा गंगाजल छिड़कें, और मन ही मन माँ को पधारने का निमंत्रण दें।
  5. ध्यान। उनका ध्यान वैसे करें जैसा कालिकाष्टकम् वर्णन करता है: श्यामवर्णा, मुस्कुराती, दाएँ हाथों से वर और अभय देती।
  6. अर्पण। कुमकुम और सिंदूर, फिर एक-एक करके लाल गुड़हल, फिर अक्षत।
  7. दीप और धूप। सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएँ और धूप दिखाएँ।
  8. भोग। नारियल, फल और मिठाई अर्पित करें।
  9. मंत्र। माला पर ॐ क्रीं कालिकायै नमः का 108 बार जप करें।
  10. पाठ। काली चालीसा और संभव हो तो कालिकाष्टकम् पढ़ें।
  11. आरती। कपूर के दीपक और घंटी के साथ अम्बे तू है जगदम्बे काली गाएँ।
  12. समापन। किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें, अपने शब्दों में अपना भय उन्हें सौंप दें, प्रणाम करें, और प्रसाद बाँटें।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • घर पर पूजा सात्त्विक रखें। मांस या मदिरा जैसी भेंट केवल कुछ विशेष मंदिर और तांत्रिक परंपराओं की हैं, गृह-पूजा की नहीं।
  • लंबे बीज मंत्रों के लिए गुरु आवश्यक है। रोज़ की भक्ति के लिए नाम मंत्र, चालीसा और स्तोत्र पूर्ण हैं।
  • भय नहीं, प्रेम से जाएँ। उनकी उग्रता उन चीज़ों पर है जो भक्तों को हानि पहुँचाती हैं। रामप्रसाद से श्री रामकृष्ण तक, उनके भक्तों ने उन्हें बस "माँ" कहा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या घर पर काली की पूजा कर सकते हैं?

हाँ। बंगाल में अनगिनत घरों में काली की पूजा होती है। पूजा ऊपर बताए अनुसार सरल और सात्त्विक रखें, और तांत्रिक रूपों को दीक्षित साधना के लिए छोड़ दें।

काली पूजा कब होती है?

कार्तिक अमावस्या को, उसी रात जब दीपावली की लक्ष्मी पूजा होती है, मुख्य रूप से बंगाल, असम और ओडिशा में। मुख्य पूजा आधी रात के आसपास होती है।

माँ काली को कौन-सा फूल चढ़ाएँ?

लाल गुड़हल (जवा) उनका सबसे प्रिय फूल है। काली पूजा की रात 108 गुड़हल की माला चढ़ाई जाती है। कोई भी लाल फूल स्वीकार्य है।

माँ काली के लिए कौन-सा मंत्र जपें?

घर की पूजा के लिए ॐ क्रीं कालिकायै नमः का 108 बार जप, साथ में काली चालीसा। नवार्ण मंत्र, जिसकी देवी चामुंडा हैं, भी व्यापक रूप से जपा जाता है।

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