न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम् । भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः ॥ ५ ॥
na cha mat-sthāni bhūtāni paśhya me yogam aiśhwaram bhūta-bhṛin na cha bhūta-stho mamātmā bhūta-bhāvanaḥ
हिंदी अर्थ
वे सब भूत मुझमें स्थित नहीं हैं; किंतु मेरी ईश्वरीय योगशक्ति को देख कि भूतों का धारण-पोषण करने वाला और भूतों को उत्पन्न करने वाला भी मेरा आत्मा वास्तव में भूतों में स्थित नहीं है।
भावार्थ
"पश्य मे योगमैश्वरम्" — मेरी ईश्वरीय योगशक्ति को देखो। श्रीकृष्ण अब कहते हैं कि पिछला कथन भी पूर्ण सत्य नहीं: ईश्वर इतने परे हैं कि "भीतर" और "बाहर" की साधारण धारणाएँ उन पर लागू नहीं होतीं।