Bhakti ArohanBhakti Arohan

भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 2

अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन । प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥ २ ॥

adhiyajñaḥ kathaṁ ko ’tra dehe ’smin madhusūdana prayāṇa-kāle cha kathaṁ jñeyo ’si niyatātmabhiḥ

हिंदी अर्थ

हे मधुसूदन! यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस शरीर में कैसे है? और युक्तचित्त वाले पुरुषों द्वारा अंत समय में आप किस प्रकार जानने में आते हैं?

भावार्थ

अर्जुन का सातवाँ प्रश्न सबसे व्यक्तिगत है: मृत्यु के क्षण में ईश्वर को कैसे जाना जा सकता है? यह अध्याय को अच्छी मृत्यु पर गीता की शिक्षा की ओर मोड़ता है।

भगवद्गीता अध्याय 8.2 | Bhakti Arohan