चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम् । तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ॥ ३४ ॥
chañchalaṁ hi manaḥ kṛiṣhṇa pramāthi balavad dṛiḍham tasyāhaṁ nigrahaṁ manye vāyor iva su-duṣhkaram
हिंदी अर्थ
क्योंकि हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल, प्रमथन स्वभाव वाला, बड़ा दृढ़ और बलवान है। इसलिए इसे वश में करना मैं वायु को रोकने की भाँति अत्यंत दुष्कर मानता हूँ।
भावार्थ
गीता के सबसे आत्मीय लगने वाले श्लोकों में से एक। अर्जुन मन के लिए चार शब्दों का प्रयोग करते हैं — चंचल, प्रमाथि (मथने वाला), बलवत् (बलवान), दृढ़ (हठी) — और इसे वश में करने की तुलना हवा को पकड़ने से करते हैं।