संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः । योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म नचिरेणाधिगच्छति ॥ ६ ॥
sannyāsas tu mahā-bāho duḥkham āptum ayogataḥ yoga-yukto munir brahma na chireṇādhigachchhati
हिंदी अर्थ
परंतु हे महाबाहो! कर्मयोग के बिना संन्यास प्राप्त होना कठिन है; और कर्मयोग से युक्त मुनि शीघ्र ही परब्रह्म को प्राप्त हो जाता है।
भावार्थ
एक व्यावहारिक चेतावनी: निष्काम कर्म से मन को पहले शुद्ध किए बिना त्याग का प्रयास प्रायः दुख (दुःखम्) ही देता है। कर्मयोग द्वार है — सच्चे संन्यास का भी।