कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम् । तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम् ॥ १५ ॥
karma brahmodbhavaṁ viddhi brahmākṣhara-samudbhavam tasmāt sarva-gataṁ brahma nityaṁ yajñe pratiṣhṭhitam
हिंदी अर्थ
कर्म को वेद से उत्पन्न जानो और वेद को अविनाशी परमात्मा से उत्पन्न। इसलिए सर्वव्यापी ब्रह्म सदा ही यज्ञ में प्रतिष्ठित है।
भावार्थ
श्रृंखला अब ऊपर तक जाती है: कर्म शास्त्र से निर्देशित है, और शास्त्र अविनाशी से आया है। इसलिए यज्ञ के रूप में किए गए हर कर्म में ईश्वर उपस्थित है — उचित रीति से अर्पित साधारण काम भी भगवान से मिलन का स्थान बन जाता है।