अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते । इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः ॥ ८ ॥
ahaṁ sarvasya prabhavo mattaḥ sarvaṁ pravartate iti matvā bhajante māṁ budhā bhāva-samanvitāḥ
हिंदी अर्थ
मैं वासुदेव ही संपूर्ण जगत की उत्पत्ति का कारण हूँ, और मुझसे ही सब जगत चेष्टा करता है — इस प्रकार समझकर श्रद्धा और भक्ति से युक्त बुद्धिमान भक्तजन मुझ परमेश्वर को ही निरंतर भजते हैं।
भावार्थ
श्लोक 8–11 को, विशेषकर गौड़ीय वैष्णव परंपरा में, "चतुःश्लोकी" — चार श्लोक — कहा जाता है, और इन्हें प्रायः पूरी गीता का सार माना जाता है। पहला आधार बताता है: ईश्वर सबके स्रोत हैं, और ज्ञानी यह समझकर "भाव" — हार्दिक भावना — से उनकी उपासना करते हैं।