पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् । झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥ ३१ ॥
pavanaḥ pavatām asmi rāmaḥ śhastra-bhṛitām aham jhaṣhāṇāṁ makaraśh chāsmi srotasām asmi jāhnavī
हिंदी अर्थ
मैं पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ; तथा मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ।
भावार्थ
श्रीराम, आदर्श योद्धा-राजा, को शस्त्रधारियों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया — स्वयं योद्धा अर्जुन के लिए एक अर्थपूर्ण उदाहरण। गंगा (जाह्नवी) को सबसे पवित्र नदी के रूप में सम्मानित किया गया है।