Bhakti ArohanBhakti Arohan

भगवद्गीता — अध्याय 10, श्लोक 11

तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः । नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ॥ ११ ॥

teṣhām evānukampārtham aham ajñāna-jaṁ tamaḥ nāśhayāmyātma-bhāva-stho jñāna-dīpena bhāsvatā

हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! उनके ऊपर अनुग्रह करने के लिए उनके अंतःकरण में स्थित हुआ मैं स्वयं ही उनके अज्ञान से उत्पन्न अंधकार को प्रकाशमय तत्त्वज्ञान रूप दीपक के द्वारा नष्ट कर देता हूँ।

भावार्थ

गीता के सबसे कोमल चित्रों में से एक: भक्त के हृदय में रहने वाले ईश्वर शुद्ध करुणा (अनुकंपा) से ज्ञान का दीपक जलाते हैं। चार सार-श्लोकों का यह अंतिम श्लोक दिखाता है कि जो भक्ति आरंभ करती है, उसे कृपा पूर्ण करती है।

भगवद्गीता अध्याय 10.11 | Bhakti Arohan