निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन । पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ॥ ३६ ॥
nihatya dhārtarāṣhṭrān naḥ kā prītiḥ syāj janārdana pāpam evāśhrayed asmān hatvaitān ātatāyinaḥ
हिंदी अर्थ
हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता मिलेगी? इन आततायियों को मारकर हमें पाप ही लगेगा।
भावार्थ
अर्जुन स्वीकार करते हैं कि कौरव "आततायी" हैं — धर्मशास्त्रों का एक पारिभाषिक शब्द, उन लोगों के लिए जो घर में आग लगाएँ, विष दें, शस्त्र से आक्रमण करें, या दूसरों की भूमि और पत्नी छीनें; दुर्योधन पाण्डवों के विरुद्ध यह सब कर चुका था। शास्त्र ऐसे आततायियों के वध की अनुमति देते थे; अर्जुन का तर्क है कि अपने ही परिवार को मारना फिर भी पाप है। वे अपनी भावनाओं को शास्त्र के सामने खड़ा कर रहे हैं — एक ऐसा द्वंद्व जिसका समाधान श्रीकृष्ण जल्द करेंगे।