तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः । सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ॥ १२ ॥
tasya sañjanayan harṣhaṁ kuru-vṛiddhaḥ pitāmahaḥ siṁha-nādaṁ vinadyochchaiḥ śhaṅkhaṁ dadhmau pratāpavān
हिंदी अर्थ
तब कुरुवंश के वयोवृद्ध, प्रतापी पितामह भीष्म ने दुर्योधन को हर्षित करते हुए सिंह के समान गर्जना करके ऊँचे स्वर में अपना शंख बजाया।
भावार्थ
भीष्म अपने पौत्र की चिंता समझ गए और उसका उत्तर उसी प्रकार दिया जैसे एक योद्धा दे सकता था — सिंहनाद और शंखनाद से। यह युद्ध का संकेत होने के साथ-साथ एक व्याकुल बालक के प्रति स्नेह का भाव भी है। पर ध्यान दें, भीष्म का शंख केवल दुर्योधन को हर्ष देता है; वह विजय का वचन नहीं देता।