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दिवाली की सफ़ाई और लक्ष्मी का वासझाड़ू-पोछे के वास्तु नियम, सही समय और नमक वाला पोछा

सूर्यास्त के बाद झाड़ू क्यों नहीं लगाते, 2026 के दिवाली के दिनों में कब झाड़ू न लगाएँ, झाड़ू कहाँ और कैसे रखें, धनतेरस (6 नवंबर) पर नई झाड़ू आने के बाद पुरानी का क्या करें, और पोछे के पानी में कितना नमक या फिटकरी डालते हैं, मार्बल और लकड़ी के फ़र्श की सावधानी के साथ।

दिवाली की सफ़ाई और लक्ष्मी का वास: झाड़ू-पोछे के वास्तु नियम, सही समय और नमक वाला पोछा

सफ़ाई पूजा का हिस्सा है, उससे पहले का काम नहीं

दिवाली की सफ़ाई के पीछे की मान्यता पुरानी और सीधी है: लक्ष्मी उस घर में आती हैं जो साफ़, रोशन और शांत हो, और उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी (दरिद्रा, यानी गरीबी और दुर्भाग्य) वहाँ रहती हैं जहाँ गंदगी, कबाड़ और कलह हो। इसीलिए दिवाली से पहले के हफ़्ते टूटी चीज़ें फेंकने, रखी चीज़ें धोने, दीवारें पोतने और टपकती चीज़ें ठीक करने में जाते हैं। इस अर्थ में झाड़ू और पोछा दिवाली की पहली पूजा सामग्री हैं। जो नियम परिवार रोज़ मानते हैं, वे इस मौसम में बस और सख़्त हो जाते हैं।

नीचे के नियम घरेलू और वास्तु परंपरा हैं, जो व्यापक रूप से माने जाते हैं पर हर जगह एक जैसे नहीं। जहाँ कोई रीति लगभग सार्वभौमिक है, वहाँ हमने यही कहा है; जहाँ बदलती है, वहाँ वह भी।

कब झाड़ू न लगाएँ

सूर्यास्त के बाद नहीं

यह सबसे ज़्यादा माना जाने वाला नियम है। शाम को लक्ष्मी के आगमन का समय माना जाता है, इसीलिए संध्या दीपक उसी समय जलता है, और तब झाड़ू लगाना धूल के साथ उन्हें बाहर करना माना जाता है। इसकी व्यावहारिक जड़ भी साफ़ है: बिजली से पहले, अँधेरे में झाड़ू लगाने का मतलब था वह भी बुहार देना जो दिखता नहीं, गिरी हुई बाली या सिक्का। रात में सफ़ाई ज़रूरी हो तो कपड़े से पोंछ लें और कचरा सुबह तक डस्टपैन में रखें, दरवाज़े से बाहर न फेंकें।

पूजा मुहूर्त में नहीं

सफ़ाई पूजा से पहले पूरी करें, पूजा के आसपास नहीं। दिवाली, रविवार 8 नवंबर 2026 को दिल्ली में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 तक है, और प्रदोष काल 5:31 से शुरू होता है। कोशिश करें कि दोपहर तक घर में झाड़ू-पोछा होकर फ़र्श सूख जाए, ताकि रंगोली और दीये रखते समय फ़र्श गीला न हो।

दिवाली की रात पूजा के बाद नहीं

बहुत-से परिवार लक्ष्मी पूजा से अगली सुबह तक बिल्कुल झाड़ू नहीं लगाते, चाहे दीये का तेल टपके या रंगोली बिखरे। घर लक्ष्मी के लिए वैसा ही छोड़ दिया जाता है। पहली झाड़ू अगले दिन भोर में लगती है।

किसी ख़ास तिथि का क्या?

इंटरनेट पर दावे मिलते हैं कि कुछ तिथियों पर दोपहर में पोछा लगाने से समृद्धि जाती है। ऐसा नियम हमें किसी ऐसे ग्रंथ में नहीं मिला जिसका हम हवाला दे सकें, और हम कोई नियम गढ़ना नहीं चाहते। समय से जुड़ी जो रीतियाँ सचमुच व्यापक हैं, वे ऊपर की हैं: सूर्यास्त के बाद नहीं, पूजा के समय नहीं, और दिवाली की रात नहीं।

झाड़ू: कहाँ, कैसे और किस दिशा में

  • नज़रों से छिपाकर रखें। झाड़ू को दरिद्रता हटाने वाली लक्ष्मी का रूप माना जाता है, और लक्ष्मी की चीज़ दिखावे के लिए नहीं रखी जाती। दरवाज़े के पीछे या अलमारी में रखें, बैठक में नहीं जहाँ मेहमान देखें।
  • लिटाकर रखें या उल्टा टाँगें। सींकों के बल खड़ी झाड़ू व्यापक रूप से अशुभ मानी जाती है, और इससे सींकें भी मुड़ती हैं। लिटाकर या सींकें नीचे करके टाँगना, दोनों ठीक हैं।
  • दिशा। वास्तु गाइड प्रायः सफ़ाई का सामान घर के दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में रखने और ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से दूर रखने को कहते हैं, जो मंदिर और जल का कोना है। रसोई में चूल्हे के पास या पूजा घर में झाड़ू कभी न रखें।
  • न लांघें, न पैर लगाएँ। गलती से लग जाए तो बहुत-से लोग उसे हाथ से छूकर माथे से लगाते हैं, जैसे किताब को।
  • मेहमान के जाते ही झाड़ू नहीं। मेहमान के निकलते ही, या यात्रा पर जा रहे व्यक्ति की ओर झाड़ू न लगाएँ।

धनतेरस की नई झाड़ू, और पुरानी

नई झाड़ू धनतेरस की सामान्य खरीदारी है, जो इस बार शुक्रवार 6 नवंबर 2026 को है। परिवार इसे ऐसे करते हैं:

  1. धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदें और पूजा के सामान के साथ रखें। कुछ लोग उस पर रोली का तिलक लगाते हैं और सफ़ेद धागा या कलावा बाँधते हैं।
  2. धनतेरस के दिन उसे काम में न लें। अगले दिन, छोटी दिवाली से इस्तेमाल शुरू करें।
  3. पुरानी झाड़ू नई के घर आने के बाद हटाएँ, पहले नहीं। बहुत-से परिवार यह शनिवार 7 नवंबर को करते हैं, जो इस प्रचलित मान्यता से भी मेल खाता है कि पुरानी झाड़ू हटाने के लिए शनिवार अच्छा है। धनतेरस या दिवाली पर, और गुरुवार-शुक्रवार को, जो गुरु और लक्ष्मी से जुड़े हैं, इसे फेंकने से बचें।
  4. पुरानी झाड़ू जलाएँ नहीं। उसे कचरा इकट्ठा होने की जगह पर या किसी पेड़ के नीचे, रास्ते से हटकर रखें, जहाँ उस पर पैर न पड़े। अगर बाहर के काम की हो, तो बहुत-से परिवार उसे फेंकने के बजाय आँगन या छत के लिए रख लेते हैं।

नमक या फिटकरी वाला पोछा

दिवाली से पहले के दिनों में, ख़ासकर दिवाली की सुबह और गुरुवार को, पोछे के पानी में नमक डालना आम रीति है। माना जाता है कि नमक नकारात्मकता और ठहरी हुई ऊर्जा सोख लेता है; फिटकरी का भी यही उपयोग है, और यह सफ़ाई के साथ बदबू भी दूर करती है।

कितना डालें

कोई ग्रंथ अनुपात तय नहीं करता। व्यवहार में घरों में 8 से 10 लीटर की एक बाल्टी में लगभग एक बड़ा चम्मच भरकर मोटा समुद्री या खड़ा नमक, या अखरोट जितना फिटकरी का एक टुकड़ा, पूरी तरह घोलकर डाला जाता है। ज़्यादा नमक से कोई लाभ नहीं, बस सफ़ेद परत रह जाती है।

कैसे करें

  1. पहले झाड़ू, फिर पोछा। धूल भरे फ़र्श पर पोछा गंदगी ही फैलाता है।
  2. घर के भीतर से मुख्य द्वार की ओर, और ईशान कोण से बाहर की ओर पोछा लगाएँ, ताकि साफ़ हुई चीज़ बाहर की ओर जाए।
  3. पानी गंदा हो तो बदलें, और इस्तेमाल हुआ पानी बाहर नाली में डालें, पौधों में नहीं।
  4. दिवाली की शाम रंगोली बन जाने के बाद पोछा न लगाएँ।

फ़र्श के लिए सावधानी

नमक का पानी समय के साथ मार्बल, ग्रेनाइट और पॉलिश पत्थर की चमक कम कर सकता है और लकड़ी व लैमिनेट फ़र्श को नुकसान पहुँचा सकता है। ऐसे फ़र्श पर बहुत हल्का रखें, बाद में सादे पानी से पोंछ लें, या यह रीति केवल प्रवेश द्वार और कोनों में निभाएँ। मार्बल पर फिटकरी के साथ भी यही बात है। सिरेमिक और विट्रीफ़ाइड टाइल्स पर कोई दिक्कत नहीं।

दिवाली से पहले सफ़ाई का सरल क्रम

  1. लगभग 17 अक्टूबर से: टूटी चीज़ें, पुराने कपड़े, एक्सपायर्ड दवाइयाँ और बंद घड़ियाँ हटाएँ; टपकते नल ठीक कराएँ।
  2. एक हफ़्ता पहले: पर्दे और बिस्तर धोएँ, रसोई और स्टोर साफ़ करें, पंखे-लाइटें पोंछें, दीवारें पुतवाएँ या ठीक कराएँ।
  3. धनतेरस (6 नवंबर): मंदिर साफ़ करें, भगवान के वस्त्र और पीतल के बर्तन धोएँ, नई झाड़ू लाएँ।
  4. छोटी दिवाली (7 नवंबर): बाथरूम, मुख्य द्वार और देहरी; पुरानी झाड़ू हटाएँ। बहुत-से घरों में इसी दिन अभ्यंग स्नान, यानी तेल-उबटन का स्नान भी होता है।
  5. दिवाली (8 नवंबर): सुबह आख़िरी झाड़ू और नमक का पोछा, फिर रंगोली और दीये; सूर्यास्त के बाद झाड़ू नहीं।

उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में दिवाली के अगले दिन भोर में घर की कोई स्त्री पुराना सूप पीटते हुए हर कमरे से होकर दरवाज़े के बाहर तक जाती है और कहती है "ईश्वर आवे, दलिद्दर जावे", और सूप बाहर छोड़ दिया जाता है। यह झाड़ू के नियमों वाला ही भाव है, जो एक रीति बन गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाना सचमुच गलत है?

यह सबसे ज़्यादा मानी जाने वाली घरेलू रीतियों में से है, जो शाम को लक्ष्मी के आगमन से जुड़ी है। सफ़ाई ज़रूरी हो तो कपड़े से पोंछें और कचरा सुबह तक डस्टपैन में रखें, रात में दरवाज़े से बाहर न फेंकें।

2026 में पुरानी झाड़ू कब फेंकें?

धनतेरस (6 नवंबर) को नई आने के बाद। बहुत-से परिवार इसे शनिवार 7 नवंबर को हटाते हैं। धनतेरस, दिवाली, गुरुवार या शुक्रवार को ऐसा करने से बचें, और इसे जलाएँ नहीं।

क्या धनतेरस की नई झाड़ू उसी दिन काम में ले सकते हैं?

प्रचलित रीति है कि उस दिन उसे पूजा के सामान के साथ रखें और अगली सुबह से इस्तेमाल करें।

पोछे के पानी में कितना नमक डालें?

8 से 10 लीटर की बाल्टी में लगभग एक बड़ा चम्मच भरकर मोटा नमक, पूरी तरह घुला हुआ। कोई ग्रंथ सटीक अनुपात नहीं बताता, और ज़्यादा नमक बस परत छोड़ता है।

क्या नमक का पानी मार्बल फ़र्श खराब करेगा?

बार-बार इस्तेमाल से कर सकता है: पॉलिश पत्थर की चमक घटती है और लकड़ी व लैमिनेट को नुकसान होता है। ऐसे फ़र्श पर बहुत कम डालें, बाद में सादे पानी से पोंछें, या नमक का पोछा केवल प्रवेश द्वार तक रखें।

वास्तु के अनुसार झाड़ू कहाँ रखें?

नज़रों से छिपाकर, लिटाकर या सींकें नीचे करके टाँगकर, प्रायः घर के दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में। ईशान कोण, मंदिर या रसोई में चूल्हे के पास कभी नहीं।

क्या दिवाली की रात पूजा के बाद झाड़ू लगा सकते हैं?

ज़्यादातर परिवार नहीं लगाते। घर लक्ष्मी के लिए वैसा ही छोड़ देते हैं और अगली सुबह भोर में झाड़ू लगाते हैं।

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लेखकBhakti Arohan Teamप्रकाशित7 मिनट में पढ़ें

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