प्रथम पूज्य
गणेश प्रथम पूज्य हैं: किसी भी देवता की हर पूजा उन्हीं से आरंभ होती है, क्योंकि वे विघ्नहर्ता हैं। उनकी अपनी पूजा आत्मीय और सरल है, तीन प्रिय चीज़ों के इर्द-गिर्द: दूर्वा, मोदक और लाल फूल।
कब करें
- बुधवार, उनका दिन। देखें बुधवार गणेश भक्ति।
- संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष की चतुर्थी): व्रत, जो चंद्रमा के दर्शन और उसे अर्घ्य देकर खोला जाता है।
- विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष की चतुर्थी), और सबसे बढ़कर भाद्रपद की गणेश चतुर्थी।
- किसी भी नई शुरुआत से पहले: व्यापार, यात्रा, परीक्षा, गृहप्रवेश।
पूजा सामग्री
- गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
- दूर्वा: 21 दूब, छोटे गुच्छों में बँधी
- लाल फूल (गुड़हल विशेष प्रिय), माला, और मिलें तो कुछ शमी पत्र
- सिंदूर या लाल चंदन, अक्षत, रोली
- घी का दीपक, धूप, कपूर
- भोग के लिए मोदक या मोतीचूर के लड्डू, और एक केला
क्रमवार विधि
- तैयारी। स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें, और पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
- संकल्प। दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम और कामना कहें, फिर जल छोड़ दें।
- आवाहन। प्रतिमा पर थोड़ा जल छिड़कें और गणेश जी को पधारने का निमंत्रण दें।
- तिलक। सिंदूर या लाल चंदन लगाएँ, और अक्षत चढ़ाएँ।
- दूर्वा। हर गुच्छे के साथ ॐ गं गणपतये नमः बोलते हुए एक-एक करके दूर्वा चढ़ाएँ।
- फूल। लाल फूल, माला और शमी पत्र चढ़ाएँ।
- दीप और धूप। दीपक जलाएँ और धूप दिखाएँ।
- भोग। मोदक या लड्डू और केले का भोग लगाएँ।
- मंत्र। वक्रतुण्ड महाकाय पढ़ें, और ॐ गं गणपतये नमः या गणेश गायत्री मंत्र का 108 बार जप करें।
- पाठ। संकटनाशन गणेश स्तोत्र या गणेश चालीसा पढ़ें।
- आरती। जय गणेश देवा गाएँ, या मराठी परंपरा में सुखकर्ता दुःखहर्ता।
- समापन। क्षमा माँगें, प्रणाम करें, और मोदक प्रसाद के रूप में बाँटें।
ध्यान रखने योग्य बातें
- गणेश जी को तुलसी नहीं। एक पौराणिक कथा कहती है कि उन्होंने तुलसी का विवाह-प्रस्ताव अस्वीकार किया था, और सामान्य पूजा में उन्हें तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) की रात चंद्रमा न देखें। गणेश जी का उपहास करने पर चंद्रमा को शाप मिला था, और उस रात उसे देखने से झूठा कलंक लगने की मान्यता है।
- संकष्टी पर व्रत चंद्रोदय के बाद, चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही खोला जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ाएँ?
इक्कीस पारंपरिक है, प्रायः तीन या पाँच के गुच्छों में। भक्ति से चढ़ाई एक ताज़ी दूब भी स्वीकार होती है।
गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों होती है?
वे विघ्नहर्ता और आरंभ के स्वामी हैं, इसलिए हर पूजा और हर काम उन्हीं से शुरू होता है, जैसा कि स्वयं शिव ने विधान किया बताया जाता है।
गणेश जी का प्रिय भोग क्या है?
सबसे बढ़कर मोदक, फिर मोतीचूर या बेसन के लड्डू, केला और गुड़।
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