ॐ
पंचांग4 मार्च 2031
मंगलवार · नई दिल्ली · किसी भी तारीख़ और शहर के लिए तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त और चौघड़िया।
🪔 एकादशीआमलकी एकादशी
पंचांग (पाँच अंग)
- तिथि
- शुक्ल पक्ष एकादशी 6:19 am, 5 मार्च तकशुक्ल पक्ष द्वादशी पूर्ण रात्रि तक
- वार
- मंगलवार
- नक्षत्र
- पुनर्वसु पूर्ण रात्रि तक
- योग
- आयुष्मान 8:19 am तकसौभाग्य पूर्ण रात्रि तक
- करण
- वणिज 5:15 pm तकविष्टि (भद्रा) 6:19 am, 5 मार्च तकबव पूर्ण रात्रि तक
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- 6:43 am
- सूर्यास्त
- 6:22 pm
- चंद्रोदय
- 2:08 pm
- चंद्रास्त
- 3:13 am
- सूर्य राशि
- कुंभ
- चंद्र राशि
- मिथुन 2:26 am, 5 मार्च तककर्क पूर्ण रात्रि तक
हिंदू कैलेंडर
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- मास (पूर्णिमांत)
- फाल्गुन
- मास (अमांत)
- फाल्गुन
- विक्रम संवत्
- 2087
- शक संवत्
- 1952
- ऋतु
- Vasant
- अयन
- उत्तरायण
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त
- 5:04 am – 5:54 am
- अभिजीत मुहूर्त
- 12:09 pm – 12:56 pm
- अमृत काल
- 6:24 am – 8:10 am
अशुभ समय
- राहु काल
- 3:27 pm – 4:55 pm
- यमगण्ड
- 9:38 am – 11:05 am
- गुलिक काल
- 12:33 pm – 2:00 pm
- दुर्मुहूर्त
- 9:03 am – 9:50 am, 1:43 pm – 2:29 pm
- वर्ज्यम्
- 7:43 pm – 9:30 pm
- दिशाशूल
- उत्तर
चौघड़िया
अमृत, शुभ और लाभ काम शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए ठीक है; रोग, काल और उद्वेग में कोई नया काम न करें।
दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
- रोग6:43 am – 8:11 am
- उद्वेग8:11 am – 9:38 am
- चर9:38 am – 11:05 am
- लाभ11:05 am – 12:33 pm
- अमृत12:33 pm – 2:00 pm
- काल2:00 pm – 3:27 pm
- शुभ3:27 pm – 4:55 pm
- रोग4:55 pm – 6:22 pm
रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)
- काल6:22 pm – 7:55 pm
- लाभ7:55 pm – 9:27 pm
- उद्वेग9:27 pm – 11:00 pm
- शुभ11:00 pm – 12:32 am
- अमृत12:32 am – 2:05 am
- चर2:05 am – 3:37 am
- रोग3:37 am – 5:10 am
- काल5:10 am – 6:42 am
रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
1होलाष्टक आरंभ234आमलकी एकादशी5एकादशी पारण6एकादशी पारण7प्रदोष व्रत (शुक्ल)8होलिका दहन9डोल यात्रा10होली (धुलंडी)1112संकष्टी चतुर्थी13रंग पंचमी141516171819पापमोचनी एकादशी20एकादशी पारण21प्रदोष व्रत (कृष्ण)22मासिक शिवरात्रि23चैत्र नवरात्रि घटस्थापना24उगादि / गुड़ी पड़वा25चेटी चंड (झूलेलाल जयंती)26गणगौर27विनायक चतुर्थी28चैत्र नवरात्रि पंचमी29यमुना छठ30चैत्र नवरात्रि सप्तमी31दुर्गा अष्टमी (चैत्र)
🌕 पूर्णिमा🌑 अमावस्या🪔 एकादशीतिथि सूर्योदय के समय की दिखाई गई है।
पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी और त्योहार — मार्च 2031
- 4 मार्च, मंगलवारएकादशीआमलकी एकादशी
- 8 मार्च, शनिवारत्योहारहोलिका दहन
- 9 मार्च, रविवारपूर्णिमाडोल यात्रा
- 10 मार्च, सोमवारत्योहारहोली (धुलंडी)
- 10 मार्च, सोमवारत्योहारहोला मोहल्ला
- 19 मार्च, बुधवारएकादशीपापमोचनी एकादशी
- 23 मार्च, रविवारअमावस्याअमावस्या
- 23 मार्च, रविवारत्योहारचैत्र नवरात्रि घटस्थापना
- 24 मार्च, सोमवारत्योहारउगादि / गुड़ी पड़वा
- 24 मार्च, सोमवारत्योहारचैत्र नवरात्रि घटस्थापना
- 25 मार्च, मंगलवारत्योहारचेटी चंड (झूलेलाल जयंती)
- 31 मार्च, सोमवारत्योहारदुर्गा अष्टमी (चैत्र)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शहर बदलने पर पंचांग क्यों बदलता है?
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और गुवाहाटी में सूर्योदय अहमदाबाद से एक घंटे से भी ज़्यादा पहले होता है। सूर्योदय पर आधारित हर चीज़ — उदया तिथि, राहु काल, चौघड़िया, अभिजीत मुहूर्त — उसी के साथ बदलती है, इसलिए किसी दिन किसी शहर का पंचांग दिल्ली से एक तिथि अलग भी हो सकता है।
व्रत या त्योहार के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?
ज़्यादातर व्रत उदया तिथि — सूर्योदय के समय की तिथि — से माने जाते हैं, जो कैलेंडर में हर दिन दिखाई गई है। कुछ पर्वों में किसी विशेष समय की तिथि देखी जाती है: करवा चौथ और संकष्टी में चंद्रोदय पर चतुर्थी, दीपावली में प्रदोष काल में अमावस्या, और जन्माष्टमी में अर्धरात्रि। इसलिए व्रत की तारीख़ कभी-कभी उदया तिथि से अलग होती है।
पूर्णिमांत और अमांत मास में क्या अंतर है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है; गुजरात, महाराष्ट्र और अधिकांश दक्षिण भारत (अमांत) में अमावस्या पर। शुक्ल पक्ष में दोनों एक ही होते हैं, पर कृष्ण पक्ष में उत्तर भारतीय मास एक आगे चलता है — एक ही दिन दिल्ली में कार्तिक कृष्ण और पुणे में आश्विन कृष्ण हो सकता है। इसीलिए दोनों नाम दिए गए हैं।
तिथि के आगे कभी "पूर्ण रात्रि" क्यों लिखा होता है?
इसका अर्थ है कि वह तिथि, नक्षत्र या योग अगले सूर्योदय तक चलता रहेगा, यानी पूरे पंचांग दिवस में रहेगा। एक तिथि औसतन 24 घंटे से थोड़ी कम होती है, पर लगभग 20 से 27 घंटे तक की हो सकती है — इसलिए कभी कोई तिथि दो सूर्योदयों तक रहती है (वृद्धि) और कभी किसी सूर्योदय को छूती ही नहीं (क्षय तिथि)।
क्या राहु काल में हर काम से बचना चाहिए?
राहु काल में कोई नई शुरुआत — यात्रा, ख़रीदारी, व्यापारिक सौदा, किसी कामना से की जाने वाली पूजा — टाली जाती है। पहले से चल रहे काम, रोज़मर्रा के काम और नियमित दैनिक पूजा सामान्य रूप से होती है। यमगण्ड और गुलिक काल को भी इसी तरह, पर कम कड़ाई से, देखा जाता है।
ये समय कितने सटीक हैं?
सभी गणनाएँ चुने गए शहर के लिए खगोलीय रूप से (लाहिड़ी अयनांश, सूर्य के ऊपरी किनारे से सूर्योदय) की जाती हैं, इसलिए समय आम तौर पर छपे पंचांगों से एक-दो मिनट के भीतर मिलते हैं। अलग-अलग परंपराओं के पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, और किसी-किसी त्योहार पर स्थानीय परंपरा अलग दिन चुनती है — ऐसे में अपने पुरोहित या मंदिर का अनुसरण करें।
