Bhakti Arohan
ॐ

पंचांग — 10 जनवरी 2019

गुरुवार · नई दिल्ली · किसी भी तारीख़ और शहर के लिए तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त और चौघड़िया।

विनायक चतुर्थी

पंचांग (पाँच अंग)

तिथि
शुक्ल पक्ष चतुर्थी 5:22 pm तकशुक्ल पक्ष पंचमी पूर्ण रात्रि तक
वार
गुरुवार
नक्षत्र
शतभिषा 5:54 am, 11 जन॰ तकपूर्वा भाद्रपद पूर्ण रात्रि तक
योग
व्यतीपात 6:30 am, 11 जन॰ तकवरीयान पूर्ण रात्रि तक
करण
विष्टि (भद्रा) 5:22 pm तकबव 6:40 am, 11 जन॰ तकबालव पूर्ण रात्रि तक

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
7:15 am
सूर्यास्त
5:41 pm
चंद्रोदय
10:02 am
चंद्रास्त
9:27 pm
सूर्य राशि
धनु
चंद्र राशि
कुंभ पूर्ण रात्रि तक

हिंदू कैलेंडर

पक्ष
शुक्ल पक्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
मास (अमांत)
पौष
विक्रम संवत्
2075
शक संवत्
1940
ऋतु
Shishir
अयन
उत्तरायण

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त
5:26 am – 6:20 am
अभिजीत मुहूर्त
12:07 pm – 12:49 pm
अमृत काल
9:47 pm – 11:35 pm

अशुभ समय

राहु काल
1:46 pm – 3:05 pm
यमगण्ड
7:15 am – 8:33 am
गुलिक काल
9:51 am – 11:10 am
दुर्मुहूर्त
7:57 am – 8:38 am, 1:31 pm – 2:13 pm
वर्ज्यम्
10:57 am – 12:45 pm
दिशाशूल
दक्षिण

चौघड़िया

अमृत, शुभ और लाभ काम शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए ठीक है; रोग, काल और उद्वेग में कोई नया काम न करें।

दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)

  • शुभ7:15 am – 8:33 am
  • रोग8:33 am – 9:51 am
  • उद्वेग9:51 am – 11:10 am
  • चर11:10 am – 12:28 pm
  • लाभ12:28 pm – 1:46 pm
  • अमृत1:46 pm – 3:05 pm
  • काल3:05 pm – 4:23 pm
  • शुभ4:23 pm – 5:41 pm

रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)

  • अमृत5:41 pm – 7:23 pm
  • चर7:23 pm – 9:05 pm
  • रोग9:05 pm – 10:46 pm
  • काल10:46 pm – 12:28 am
  • लाभ12:28 am – 2:10 am
  • उद्वेग2:10 am – 3:51 am
  • शुभ3:51 am – 5:33 am
  • अमृत5:33 am – 7:15 am
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हिंदू कैलेंडर — जनवरी 2019

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1Saphala Ekadashi2एकादशी पारण3मार्गशीर्ष गुरुवार4मासिक शिवरात्रि5678910विनायक चतुर्थी1112Skanda Sashti1314Banada Ashtami151617Pausha Putrada Ekadashi18एकादशी पारण19प्रदोष व्रत (शुक्ल)2021शाकंभरी पूर्णिमा222324संकष्टी चतुर्थी25262728293031षटतिला एकादशी

🌕 पूर्णिमा🌑 अमावस्या🪔 एकादशीतिथि सूर्योदय के समय की दिखाई गई है।

पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी और त्योहार — जनवरी 2019

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहर बदलने पर पंचांग क्यों बदलता है?
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और गुवाहाटी में सूर्योदय अहमदाबाद से एक घंटे से भी ज़्यादा पहले होता है। सूर्योदय पर आधारित हर चीज़ — उदया तिथि, राहु काल, चौघड़िया, अभिजीत मुहूर्त — उसी के साथ बदलती है, इसलिए किसी दिन किसी शहर का पंचांग दिल्ली से एक तिथि अलग भी हो सकता है।
व्रत या त्योहार के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?
ज़्यादातर व्रत उदया तिथि — सूर्योदय के समय की तिथि — से माने जाते हैं, जो कैलेंडर में हर दिन दिखाई गई है। कुछ पर्वों में किसी विशेष समय की तिथि देखी जाती है: करवा चौथ और संकष्टी में चंद्रोदय पर चतुर्थी, दीपावली में प्रदोष काल में अमावस्या, और जन्माष्टमी में अर्धरात्रि। इसलिए व्रत की तारीख़ कभी-कभी उदया तिथि से अलग होती है।
पूर्णिमांत और अमांत मास में क्या अंतर है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है; गुजरात, महाराष्ट्र और अधिकांश दक्षिण भारत (अमांत) में अमावस्या पर। शुक्ल पक्ष में दोनों एक ही होते हैं, पर कृष्ण पक्ष में उत्तर भारतीय मास एक आगे चलता है — एक ही दिन दिल्ली में कार्तिक कृष्ण और पुणे में आश्विन कृष्ण हो सकता है। इसीलिए दोनों नाम दिए गए हैं।
तिथि के आगे कभी "पूर्ण रात्रि" क्यों लिखा होता है?
इसका अर्थ है कि वह तिथि, नक्षत्र या योग अगले सूर्योदय तक चलता रहेगा, यानी पूरे पंचांग दिवस में रहेगा। एक तिथि औसतन 24 घंटे से थोड़ी कम होती है, पर लगभग 20 से 27 घंटे तक की हो सकती है — इसलिए कभी कोई तिथि दो सूर्योदयों तक रहती है (वृद्धि) और कभी किसी सूर्योदय को छूती ही नहीं (क्षय तिथि)।
क्या राहु काल में हर काम से बचना चाहिए?
राहु काल में कोई नई शुरुआत — यात्रा, ख़रीदारी, व्यापारिक सौदा, किसी कामना से की जाने वाली पूजा — टाली जाती है। पहले से चल रहे काम, रोज़मर्रा के काम और नियमित दैनिक पूजा सामान्य रूप से होती है। यमगण्ड और गुलिक काल को भी इसी तरह, पर कम कड़ाई से, देखा जाता है।
ये समय कितने सटीक हैं?
सभी गणनाएँ चुने गए शहर के लिए खगोलीय रूप से (लाहिड़ी अयनांश, सूर्य के ऊपरी किनारे से सूर्योदय) की जाती हैं, इसलिए समय आम तौर पर छपे पंचांगों से एक-दो मिनट के भीतर मिलते हैं। अलग-अलग परंपराओं के पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, और किसी-किसी त्योहार पर स्थानीय परंपरा अलग दिन चुनती है — ऐसे में अपने पुरोहित या मंदिर का अनुसरण करें।