Bhakti Arohan
ॐ

पंचांग — 20 जनवरी 2012

शुक्रवार · नई दिल्ली · किसी भी तारीख़ और शहर के लिए तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त और चौघड़िया।

एकादशी पारण

पंचांग (पाँच अंग)

तिथि
कृष्ण पक्ष द्वादशी 5:35 pm तककृष्ण पक्ष त्रयोदशी पूर्ण रात्रि तक
वार
शुक्रवार
नक्षत्र
ज्येष्ठा 5:55 pm तकमूल पूर्ण रात्रि तक
योग
ध्रुव 12:36 am, 21 जन॰ तकव्याघात पूर्ण रात्रि तक
करण
तैतिल 5:35 pm तकगर 4:41 am, 21 जन॰ तकवणिज पूर्ण रात्रि तक

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
7:14 am
सूर्यास्त
5:49 pm
चंद्रोदय
4:18 am
चंद्रास्त
2:58 pm
सूर्य राशि
मकर
चंद्र राशि
वृश्चिक 5:55 pm तकधनु पूर्ण रात्रि तक

हिंदू कैलेंडर

पक्ष
कृष्ण पक्ष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
मास (अमांत)
पौष
विक्रम संवत्
2068
शक संवत्
1933
ऋतु
Shishir
अयन
उत्तरायण

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त
5:26 am – 6:20 am
अभिजीत मुहूर्त
12:10 pm – 12:53 pm
अमृत काल
9:34 am – 11:05 am

अशुभ समय

राहु काल
11:12 am – 12:32 pm
यमगण्ड
3:10 pm – 4:30 pm
गुलिक काल
8:33 am – 9:53 am
दुर्मुहूर्त
9:21 am – 10:03 am, 10:46 am – 11:28 am
वर्ज्यम्
1:33 am – 3:05 am
दिशाशूल
पश्चिम

चौघड़िया

अमृत, शुभ और लाभ काम शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए ठीक है; रोग, काल और उद्वेग में कोई नया काम न करें।

दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)

  • चर7:14 am – 8:33 am
  • लाभ8:33 am – 9:53 am
  • अमृत9:53 am – 11:12 am
  • काल11:12 am – 12:32 pm
  • रोग12:32 pm – 1:51 pm
  • शुभ1:51 pm – 3:10 pm
  • उद्वेग3:10 pm – 4:30 pm
  • चर4:30 pm – 5:49 pm

रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)

  • रोग5:49 pm – 7:30 pm
  • काल7:30 pm – 9:10 pm
  • लाभ9:10 pm – 10:51 pm
  • उद्वेग10:51 pm – 12:31 am
  • शुभ12:31 am – 2:12 am
  • अमृत2:12 am – 3:53 am
  • चर3:53 am – 5:33 am
  • रोग5:33 am – 7:14 am
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हिंदू कैलेंडर — जनवरी 2012

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रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
1Banada Ashtami234Pausha Putrada Ekadashi5Pausha Putrada Ekadashi6एकादशी पारण7प्रदोष व्रत (शुक्ल)89शाकंभरी पूर्णिमा10111213संकष्टी चतुर्थी1415लोहड़ी16171819षटतिला एकादशी20एकादशी पारण21प्रदोष व्रत (कृष्ण)22मासिक शिवरात्रि23मौनी अमावस्या24माघ गुप्त नवरात्रि आरंभ252627विनायक चतुर्थी28वसंत पंचमी2930रथ सप्तमी31भीष्म अष्टमी

🌕 पूर्णिमा🌑 अमावस्या🪔 एकादशीतिथि सूर्योदय के समय की दिखाई गई है।

पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी और त्योहार — जनवरी 2012

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहर बदलने पर पंचांग क्यों बदलता है?
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और गुवाहाटी में सूर्योदय अहमदाबाद से एक घंटे से भी ज़्यादा पहले होता है। सूर्योदय पर आधारित हर चीज़ — उदया तिथि, राहु काल, चौघड़िया, अभिजीत मुहूर्त — उसी के साथ बदलती है, इसलिए किसी दिन किसी शहर का पंचांग दिल्ली से एक तिथि अलग भी हो सकता है।
व्रत या त्योहार के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?
ज़्यादातर व्रत उदया तिथि — सूर्योदय के समय की तिथि — से माने जाते हैं, जो कैलेंडर में हर दिन दिखाई गई है। कुछ पर्वों में किसी विशेष समय की तिथि देखी जाती है: करवा चौथ और संकष्टी में चंद्रोदय पर चतुर्थी, दीपावली में प्रदोष काल में अमावस्या, और जन्माष्टमी में अर्धरात्रि। इसलिए व्रत की तारीख़ कभी-कभी उदया तिथि से अलग होती है।
पूर्णिमांत और अमांत मास में क्या अंतर है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है; गुजरात, महाराष्ट्र और अधिकांश दक्षिण भारत (अमांत) में अमावस्या पर। शुक्ल पक्ष में दोनों एक ही होते हैं, पर कृष्ण पक्ष में उत्तर भारतीय मास एक आगे चलता है — एक ही दिन दिल्ली में कार्तिक कृष्ण और पुणे में आश्विन कृष्ण हो सकता है। इसीलिए दोनों नाम दिए गए हैं।
तिथि के आगे कभी "पूर्ण रात्रि" क्यों लिखा होता है?
इसका अर्थ है कि वह तिथि, नक्षत्र या योग अगले सूर्योदय तक चलता रहेगा, यानी पूरे पंचांग दिवस में रहेगा। एक तिथि औसतन 24 घंटे से थोड़ी कम होती है, पर लगभग 20 से 27 घंटे तक की हो सकती है — इसलिए कभी कोई तिथि दो सूर्योदयों तक रहती है (वृद्धि) और कभी किसी सूर्योदय को छूती ही नहीं (क्षय तिथि)।
क्या राहु काल में हर काम से बचना चाहिए?
राहु काल में कोई नई शुरुआत — यात्रा, ख़रीदारी, व्यापारिक सौदा, किसी कामना से की जाने वाली पूजा — टाली जाती है। पहले से चल रहे काम, रोज़मर्रा के काम और नियमित दैनिक पूजा सामान्य रूप से होती है। यमगण्ड और गुलिक काल को भी इसी तरह, पर कम कड़ाई से, देखा जाता है।
ये समय कितने सटीक हैं?
सभी गणनाएँ चुने गए शहर के लिए खगोलीय रूप से (लाहिड़ी अयनांश, सूर्य के ऊपरी किनारे से सूर्योदय) की जाती हैं, इसलिए समय आम तौर पर छपे पंचांगों से एक-दो मिनट के भीतर मिलते हैं। अलग-अलग परंपराओं के पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, और किसी-किसी त्योहार पर स्थानीय परंपरा अलग दिन चुनती है — ऐसे में अपने पुरोहित या मंदिर का अनुसरण करें।