Bhakti Arohan
ॐ

पंचांग — 13 अक्टूबर 1998

मंगलवार · नई दिल्ली · किसी भी तारीख़ और शहर के लिए तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त और चौघड़िया।

पंचांग (पाँच अंग)

तिथि
कृष्ण पक्ष नवमी 4:35 am, 14 अक्टू॰ तककृष्ण पक्ष दशमी पूर्ण रात्रि तक
वार
मंगलवार
नक्षत्र
पुनर्वसु 7:42 am तकपुष्य पूर्ण रात्रि तक
योग
सिद्ध 2:37 am, 14 अक्टू॰ तकसाध्य पूर्ण रात्रि तक
करण
तैतिल 4:26 pm तकगर 4:35 am, 14 अक्टू॰ तकवणिज पूर्ण रात्रि तक

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
6:20 am
सूर्यास्त
5:54 pm
चंद्रास्त
1:41 pm
सूर्य राशि
कन्या
चंद्र राशि
कर्क पूर्ण रात्रि तक

हिंदू कैलेंडर

पक्ष
कृष्ण पक्ष
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
मास (अमांत)
आश्विन
विक्रम संवत्
2055
शक संवत्
1920
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त
4:41 am – 5:30 am
अभिजीत मुहूर्त
11:44 am – 12:30 pm
अमृत काल
5:17 am – 6:54 am, 1:56 am – 3:35 am

अशुभ समय

राहु काल
3:00 pm – 4:27 pm
यमगण्ड
9:13 am – 10:40 am
गुलिक काल
12:07 pm – 1:33 pm
दुर्मुहूर्त
8:39 am – 9:25 am, 1:16 pm – 2:02 pm
वर्ज्यम्
3:59 pm – 5:38 pm
दिशाशूल
उत्तर

चौघड़िया

अमृत, शुभ और लाभ काम शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए ठीक है; रोग, काल और उद्वेग में कोई नया काम न करें।

दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)

  • रोग6:20 am – 7:47 am
  • उद्वेग7:47 am – 9:13 am
  • चर9:13 am – 10:40 am
  • लाभ10:40 am – 12:07 pm
  • अमृत12:07 pm – 1:33 pm
  • काल1:33 pm – 3:00 pm
  • शुभ3:00 pm – 4:27 pm
  • रोग4:27 pm – 5:54 pm

रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय)

  • काल5:54 pm – 7:27 pm
  • लाभ7:27 pm – 9:00 pm
  • उद्वेग9:00 pm – 10:34 pm
  • शुभ10:34 pm – 12:07 am
  • अमृत12:07 am – 1:40 am
  • चर1:40 am – 3:14 am
  • रोग3:14 am – 4:47 am
  • काल4:47 am – 6:21 am
← पिछला

हिंदू कैलेंडर — अक्टूबर 1998

अगला →
रवि
सोम
मंगल
बुध
गुरु
शुक्र
शनि
1विजयादशमी (दशहरा)2पापांकुशा एकादशी3एकादशी पारण4प्रदोष व्रत (शुक्ल)5शरद पूर्णिमा6789करवा चौथ101112अहोई अष्टमी131415रमा एकादशी16रमा एकादशी17धनतेरस18प्रदोष व्रत (कृष्ण)19नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)20काली पूजा21गोवर्धन पूजा22भाई दूज2324छठ पूजा — नहाय खाय25छठ पूजा — खरना26छठ पूजा — संध्या अर्घ्य27छठ पूजा — उषा अर्घ्य28गोपाष्टमी29जगद्धात्री पूजा30कंस वध31देवउठनी एकादशी

🌕 पूर्णिमा🌑 अमावस्या🪔 एकादशीतिथि सूर्योदय के समय की दिखाई गई है।

पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी और त्योहार — अक्टूबर 1998

आज का राशिफल पढ़ें →सभी 12 राशियों का दैनिक, साप्ताहिक और मासिक राशिफल — शुभ अंक, शुभ रंग और शुभ दिन के साथ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहर बदलने पर पंचांग क्यों बदलता है?
हिंदू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और गुवाहाटी में सूर्योदय अहमदाबाद से एक घंटे से भी ज़्यादा पहले होता है। सूर्योदय पर आधारित हर चीज़ — उदया तिथि, राहु काल, चौघड़िया, अभिजीत मुहूर्त — उसी के साथ बदलती है, इसलिए किसी दिन किसी शहर का पंचांग दिल्ली से एक तिथि अलग भी हो सकता है।
व्रत या त्योहार के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?
ज़्यादातर व्रत उदया तिथि — सूर्योदय के समय की तिथि — से माने जाते हैं, जो कैलेंडर में हर दिन दिखाई गई है। कुछ पर्वों में किसी विशेष समय की तिथि देखी जाती है: करवा चौथ और संकष्टी में चंद्रोदय पर चतुर्थी, दीपावली में प्रदोष काल में अमावस्या, और जन्माष्टमी में अर्धरात्रि। इसलिए व्रत की तारीख़ कभी-कभी उदया तिथि से अलग होती है।
पूर्णिमांत और अमांत मास में क्या अंतर है?
उत्तर भारत (पूर्णिमांत) में महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है; गुजरात, महाराष्ट्र और अधिकांश दक्षिण भारत (अमांत) में अमावस्या पर। शुक्ल पक्ष में दोनों एक ही होते हैं, पर कृष्ण पक्ष में उत्तर भारतीय मास एक आगे चलता है — एक ही दिन दिल्ली में कार्तिक कृष्ण और पुणे में आश्विन कृष्ण हो सकता है। इसीलिए दोनों नाम दिए गए हैं।
तिथि के आगे कभी "पूर्ण रात्रि" क्यों लिखा होता है?
इसका अर्थ है कि वह तिथि, नक्षत्र या योग अगले सूर्योदय तक चलता रहेगा, यानी पूरे पंचांग दिवस में रहेगा। एक तिथि औसतन 24 घंटे से थोड़ी कम होती है, पर लगभग 20 से 27 घंटे तक की हो सकती है — इसलिए कभी कोई तिथि दो सूर्योदयों तक रहती है (वृद्धि) और कभी किसी सूर्योदय को छूती ही नहीं (क्षय तिथि)।
क्या राहु काल में हर काम से बचना चाहिए?
राहु काल में कोई नई शुरुआत — यात्रा, ख़रीदारी, व्यापारिक सौदा, किसी कामना से की जाने वाली पूजा — टाली जाती है। पहले से चल रहे काम, रोज़मर्रा के काम और नियमित दैनिक पूजा सामान्य रूप से होती है। यमगण्ड और गुलिक काल को भी इसी तरह, पर कम कड़ाई से, देखा जाता है।
ये समय कितने सटीक हैं?
सभी गणनाएँ चुने गए शहर के लिए खगोलीय रूप से (लाहिड़ी अयनांश, सूर्य के ऊपरी किनारे से सूर्योदय) की जाती हैं, इसलिए समय आम तौर पर छपे पंचांगों से एक-दो मिनट के भीतर मिलते हैं। अलग-अलग परंपराओं के पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, और किसी-किसी त्योहार पर स्थानीय परंपरा अलग दिन चुनती है — ऐसे में अपने पुरोहित या मंदिर का अनुसरण करें।