प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्ध्यनादी उभावपि । विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसम्भवान् ॥ १९ ॥
prakṛitiṁ puruṣhaṁ chaiva viddhy anādī ubhāv api vikārānśh cha guṇānśh chaiva viddhi prakṛiti-sambhavān
हिंदी अर्थ
प्रकृति और पुरुष, दोनों को ही अनादि जानो, और सब विकारों तथा गुणों को प्रकृति से उत्पन्न जानो।
भावार्थ
अध्याय का दूसरा भाग शब्दों का एक नया जोड़ा अपनाता है: प्रकृति (जड़ स्वभाव) और पुरुष (चेतन आत्मा)। दोनों "अनादि" हैं। कोई दूसरे से उत्पन्न नहीं हुआ। जो कुछ भी बदलता है, तीनों गुणों सहित, वह प्रकृति का है।
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