समर्पण की पूजा
खाटू श्याम बाबा बर्बरीक हैं, जिन्होंने कृष्ण को अपना शीश दिया और बदले में कृष्ण का नाम पाया। उनकी पूजा आत्मीय, निजी और भजनों से भरी होती है, और इसका भाव समर्पण है: भक्त हारे हुए की तरह हारे के सहारे के पास आता है। किसी विस्तृत कर्मकांड की आवश्यकता नहीं। एक स्वच्छ स्थान, एक दीपक, कुछ भेंट और "जय श्री श्याम" कहता मन, बस यही पूरी पूजा है।
कब करें
- हर शुक्ल एकादशी: बाबा का विशेष दिन। बहुत-से भक्त व्रत रखते हैं, और द्वादशी को दर्शन के लिए जाते हैं।
- फाल्गुन मेला: फाल्गुन शुक्ल पक्ष का खाटू का बड़ा मेला, जो एकादशी और द्वादशी को चरम पर होता है।
- कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी), जिसे खाटू में बाबा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।
- घर पर कोई भी शाम, विशेषकर किसी कठिनाई के समय।
पूजा सामग्री
- श्याम बाबा का चित्र (मोरपंख के मुकुट वाला उनका शीश)
- घी का दीपक और धूप
- गुलाब के फूल या गुलाब की माला, और इत्र
- पान, सुपारी और इलायची, श्याम स्तुति में बताई गई पारंपरिक भेंट
- भोग: चूरमा (उनका सबसे प्रसिद्ध भोग), खीर या कोई मिठाई; कच्चा दूध भी चढ़ाया जाता है
- तुलसी या चंदन की माला
- यदि मन्नत ली हो तो एक छोटा केसरिया ध्वज (निशान)
क्रमवार विधि
- तैयारी। स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें, और मंदिर साफ़ करें। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
- पहले गणेश। गणेश जी को एक फूल चढ़ाएँ।
- संकल्प। दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम और बाबा के सामने रखी जाने वाली बात कहें, फिर जल छोड़ दें। एकादशी व्रत रख रहे हों, तो उसका संकल्प अभी लें।
- स्तुति। उन्हें आमंत्रित करने के लिए श्री श्याम स्तुति, "हाथ जोड़ विनती करूं", गाएँ।
- शृंगार। गुलाब की माला चढ़ाएँ, थोड़ा इत्र लगाएँ, और पान, सुपारी व इलायची अर्पित करें।
- दीप और धूप। घी का दीपक जलाएँ और धूप दिखाएँ।
- भोग। चूरमा या खीर का भोग लगाएँ, और चाहें तो एक गिलास कच्चा दूध।
- मंत्र। माला पर ॐ श्री श्याम देवाय नमः का 108 बार जप करें।
- चालीसा। खाटू श्याम चालीसा पढ़ें।
- आरती। ॐ जय श्री श्याम हरे गाएँ।
- समापन। प्रणाम करें, "जय श्री श्याम" का जयकारा लगाएँ, और प्रसाद बाँटें। एकादशी पर व्रत का पारण द्वादशी को पूजा या दर्शन के बाद करें।
निशान और खाटू की पदयात्रा
बाबा से मन्नत माँगने वाले भक्त प्रायः मंदिर में निशान, यानी केसरिया या रंगीन ध्वज, चढ़ाते हैं। फाल्गुन मेले में लाखों लोग रींगस से खाटू तक लगभग 17 किमी पैदल चलते हैं, निशान उठाए, भजन गाते और "जय श्री श्याम" बोलते हुए। दर्शन से पहले यात्री श्याम कुंड में स्नान करते हैं, जहाँ शीश मिला था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खाटू श्याम को कौन-सा भोग प्रिय है?
चूरमा उनसे सबसे अधिक जुड़ा भोग है, साथ में खीर और कच्चा दूध। श्याम स्तुति के अनुसार पान, सुपारी, इलायची और इत्र चढ़ाए जाते हैं, और गुलाब उनका प्रिय फूल है।
एकादशी श्याम बाबा का दिन क्यों है?
हर शुक्ल एकादशी उनका विशेष दिन मानी जाती है, और फाल्गुन का बड़ा मेला एकादशी और द्वादशी को चरम पर होता है। भक्त एकादशी को व्रत रखते हैं और द्वादशी को दर्शन करते हैं।
क्या खाटू गए बिना खाटू श्याम की पूजा कर सकते हैं?
हाँ। अधिकांश भक्त ज़्यादातर समय घर पर ही उनकी पूजा करते हैं, चित्र, दीपक, स्तुति, मंत्र, चालीसा और आरती के साथ। खाटू के दर्शन संभव होने पर की जाने वाली तीर्थयात्रा हैं, भक्ति की शर्त नहीं।
खाटू श्याम के लिए कौन-सा मंत्र जपें?
ॐ श्री श्याम देवाय नमः, 108 बार, और किसी भी समय "जय श्री श्याम" का जयकारा।
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