श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
Shri Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University, New Delhi

- स्थापना
- 1962
- प्रकार
- विश्वविद्यालय
- स्थान
- New Delhi, Delhi
परिचय
नई दिल्ली स्थित संस्कृत अध्ययन का केंद्रीय विश्वविद्यालय। इसका आरंभ विजयादशमी, 8 अक्टूबर 1962 को स्थापित एक संस्कृत विद्यापीठ के रूप में हुआ, जिसकी संस्था के संस्थापक अध्यक्ष प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे; 30 अप्रैल 2020 से यह केंद्रीय विश्वविद्यालय है। यहाँ शास्त्री, आचार्य, शिक्षाशास्त्री (बी.एड.) और पीएच.डी. पाठ्यक्रम हैं, जिनमें फलित व सिद्धान्त ज्योतिष, वास्तुशास्त्र और पौरोहित्य भी शामिल हैं।
पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र
- शास्त्री — 3 वर्ष, या ऑनर्स सहित 4 वर्ष (बी.ए. / बी.ए. ऑनर्स के समकक्ष)
- आचार्य — 2 वर्ष (एम.ए. के समकक्ष)
- शास्त्री व आचार्य के विषय: वेद, पौरोहित्य, धर्मशास्त्र, प्राचीन व नव्य व्याकरण, फलित ज्योतिष, सिद्धान्त ज्योतिष, वास्तुशास्त्र
- दर्शन के विषय: प्राचीन व नव्य न्याय, सर्वदर्शन, सांख्य योग, अद्वैत व विशिष्टाद्वैत वेदान्त, जैन दर्शन, मीमांसा
- साहित्य, पुराणेतिहास, प्राकृत
- योग में बी.ए. और एम.ए.
- शिक्षाशास्त्री (बी.एड.) और शिक्षाचार्य (एम.एड.)
- एम.ए. हिन्दू अध्ययन
- पीएच.डी., तथा अंशकालिक डिप्लोमा व सर्टिफ़िकेट पाठ्यक्रम
इतिहास
विजयादशमी 1962 को स्थापित विद्यापीठ
अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन ने 8 अक्टूबर 1962 को दिल्ली में एक संस्कृत विद्यापीठ की स्थापना की और डॉ. मण्डन मिश्र को इसका निदेशक नियुक्त किया। अखिल भारतीय संस्कृत विद्यापीठ नाम से एक अलग संस्था बनी, जिसके संस्थापक अध्यक्ष प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे; शास्त्री जी ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान बनाने की घोषणा की।
शास्त्री जी के नाम पर
उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अध्यक्ष पद स्वीकार किया और 2 अक्टूबर 1966 को घोषणा की कि यह श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ कहलाएगा। 1 अप्रैल 1967 को भारत सरकार ने इसे अपने अधीन लिया, और 21 दिसंबर 1970 को यह राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान का अंग बनकर श्री लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ कहलाया।
मानद विश्वविद्यालय, फिर केंद्रीय विश्वविद्यालय
यूजीसी की अनुशंसा पर नवंबर 1987 में इसे मानद विश्वविद्यालय (डीम्ड यूनिवर्सिटी) का दर्जा मिला; 1989 में डॉ. मण्डन मिश्र इसके पहले कुलपति बने, और 1 नवंबर 1991 से यह पूर्ण रूप से मानद विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करने लगा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम, 2020 के अंतर्गत यह केंद्रीय विश्वविद्यालय बना और 30 अप्रैल 2020 से श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम से कार्यरत है।
