Bhakti Arohan
ॐ

महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन

Maharshi Sandipani Rashtriya Vedavidya Pratishthan, Ujjain

महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन
स्थापना
20 January 1987
प्रकार
संस्थान
स्थान
Ujjain, Madhya Pradesh

परिचय

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की स्वायत्त संस्था, जिसकी स्थापना 1987 में वेदपाठ की मौखिक परंपरा के संरक्षण के लिए हुई। यह देश भर की वेद पाठशालाओं और गुरु-शिष्य परंपरा इकाइयों को सहायता देती है, राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय चलाती है, और वेदभूषण व वेद-विभूषण परीक्षाएँ आयोजित करती है।

पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र

  • वेदभूषण, प्रथम से पञ्चम वर्ष (कक्षा 6–10 के समकक्ष), सम्बद्ध वेद पाठशालाओं और गुरु-शिष्य परंपरा इकाइयों के माध्यम से
  • वेद-विभूषण, प्रथम और द्वितीय वर्ष (कक्षा 11–12 के समकक्ष)
  • राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय, उज्जैन परिसर में प्रवेश
  • वैदिक कौशल पाठ्यक्रम
  • वेद अध्यापकों के लिए पुनश्चर्या पाठ्यक्रम

इतिहास

राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान (1987)

प्रतिष्ठान की स्थापना 20 जनवरी 1987 को तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग ने सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत अखिल भारतीय स्वायत्त सोसायटी के रूप में की (पंजीयन संख्या S-17451/1987)। 30 मार्च 1987 को भारत के राजपत्र में इसकी स्थापना अधिसूचित हुई, और 10 अगस्त 1987 को अनेक राज्यों के वैदिक विद्वानों और वेदपाठियों की उपस्थिति में दिल्ली में इसका शुभारंभ हुआ।

स्थापना के उद्देश्य

  • वेद अध्ययन की श्रुति परंपरा, यानी मौखिक परंपरा, का संरक्षण, संवर्धन और विकास।
  • पाठशालाओं, मठों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से वेदों का अध्ययन-अध्यापन।
  • ऐसी अनुसंधान सुविधाएँ बनाना जो वेदों के ज्ञान को जन-सामान्य तक लाएँ और समसामयिक ज्ञान से जोड़ें।
  • अनुसंधान सामग्री का संकलन, समेकन, प्रकाशन और प्रचार-प्रसार।

आज

अब उज्जैन में श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सान्दीपनि के नाम पर यह प्रतिष्ठान चिन्तामन गणेश मंदिर के पास अपने परिसर से कार्य करता है। इससे सम्बद्ध पाठशालाओं के छात्र वेदभूषण (कक्षा 6 से 10 के समकक्ष) और वेद-विभूषण (कक्षा 11 और 12) की परीक्षाएँ देते हैं, और प्रतिष्ठान वैदिक कौशल पाठ्यक्रम तथा वेद अध्यापकों के लिए पुनश्चर्या पाठ्यक्रम भी चलाता है।