Bhakti Arohan
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कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक

Kavikulaguru Kalidas Sanskrit University, Ramtek

कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक
स्थापना
18 September 1997
प्रकार
विश्वविद्यालय
स्थान
Ramtek, Maharashtra

परिचय

महाराष्ट्र का पहला संस्कृत विश्वविद्यालय, जिसकी स्थापना राज्य सरकार ने 18 सितंबर 1997 को नागपुर ज़िले के रामटेक में की और जिसका नाम महाकवि कालिदास के नाम पर रखा गया, जिनका रामटेक से पारंपरिक संबंध माना जाता है। यहाँ वेद, व्याकरण, साहित्य, वेदान्त, ज्योतिष और दर्शन में सन्मानित शास्त्री (बी.ए. ऑनर्स) और आचार्य (एम.ए.), तथा वेदांग ज्योतिष और योगशास्त्र में बी.ए. व एम.ए. उपलब्ध हैं।

पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र

  • वेद, व्याकरण, साहित्य, वेदान्त, ज्योतिष और दर्शन में सन्मानित शास्त्री (बी.ए. ऑनर्स)
  • वेद, व्याकरण, साहित्य, वेदान्त, ज्योतिष और दर्शन में आचार्य (एम.ए.)
  • वेदांग ज्योतिष में बी.ए. और एम.ए.
  • योगशास्त्र में बी.ए. और एम.ए.
  • बी.ए. संस्कृत और एम.ए. संस्कृत (साहित्य, दर्शन, वेदान्त)
  • वेद और व्याकरण में एम.ए.

इतिहास

आरंभ

पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव, जो स्वयं संस्कृत के विद्वान थे, संस्कृत अध्ययन की समृद्ध परंपरा वाले महाराष्ट्र में एक स्वतंत्र संस्कृत विश्वविद्यालय चाहते थे। उनके प्रोत्साहन से मुख्यमंत्री सुधाकरराव नाईक ने डॉ. श्रीकांत जिचकर को एक-सदस्यीय समिति नियुक्त किया, जिनकी अध्ययन रिपोर्ट में विश्वविद्यालय का प्रारूप अधिनियम भी था। इसके बाद संस्कृत विद्वानों और शिक्षाविदों की समिति बनी, और उसकी रिपोर्ट पर राज्य सरकार ने 18 सितंबर 1997 को रामटेक में विश्वविद्यालय की स्थापना की; तब मनोहर जोशी मुख्यमंत्री थे।

रामटेक ही क्यों

कालिदास को "कविकुलगुरु" कहा गया, और माना जाता है कि उन्होंने रामटेक में रहते हुए अपने काव्य रचे — इसी कारण विश्वविद्यालय यहीं स्थापित हुआ और उनके नाम पर रखा गया। प्रख्यात संस्कृत विद्वान डॉ. पंकज चांदे इसके संस्थापक कुलपति थे।