द संस्कृत कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी, कोलकाता
The Sanskrit College and University, Kolkata

- स्थापना
- 1824
- प्रकार
- विश्वविद्यालय
- स्थान
- Kolkata, West Bengal
परिचय
1824 में स्थापित कोलकाता का संस्कृत कॉलेज, जिसके प्राचार्य कभी ईश्वरचंद्र विद्यासागर थे, 15 जून 2016 को राज्य विश्वविद्यालय बना। संस्कृत, पालि और दर्शन में ऑनर्स व एम.ए. के साथ यह साहित्य, पाणिनि (व्याकरण) और अद्वैत वेदान्त में शास्त्री पाठ्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक टोल शिक्षा को जीवित रखे हुए है।
पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र
- साहित्य, पाणिनि (व्याकरण) और अद्वैत वेदान्त में शास्त्री (पारंपरिक प्राच्य विद्या, बी.ए. के समकक्ष)
- संस्कृत, पालि और दर्शन में ऑनर्स
- संस्कृत, पालि, दर्शन, प्राचीन भारतीय एवं विश्व इतिहास और भाषाविज्ञान में एम.ए.
- नवद्वीप परिसर में संस्कृत में एम.ए.
- पीएच.डी.
इतिहास
1824 में स्थापना
कॉलेज की स्थापना गवर्नर जनरल लॉर्ड एमहर्स्ट के समय हुई और 1824 में इसकी आधारशिला रखी गई। एच. एच. विल्सन ने प्राचीन साहित्य, दर्शन, हिन्दू विधि, व्याकरण और भारतीय संस्कृति की शिक्षा के लिए इसकी स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई।
विद्यासागर का कॉलेज
ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्राचार्य काल में इसकी ख्याति बढ़ी, और 1851 में पहली बार गैर-ब्राह्मण समुदायों के विद्यार्थियों के लिए इसके द्वार खुले। आगे चलकर पंडित महेशचंद्र न्यायरत्न ने टोल पद्धति और उपाधियों की परंपरा को पुनर्जीवित किया। यह कॉलेज प्राच्य दर्शन, प्राचीन भारतीय इतिहास और पालि-प्राकृत जैसी भाषाओं का प्रसिद्ध केंद्र बना।
विश्वविद्यालय (2016)
पश्चिम बंगाल के अधिनियम XXXIII, 2015 के अंतर्गत यह द संस्कृत कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी बना, जिसने 15 जून 2016 से कार्य आरंभ किया।
