राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति
National Sanskrit University, Tirupati

- स्थापना
- 1961
- प्रकार
- विश्वविद्यालय
- स्थान
- Tirupati, Andhra Pradesh
परिचय
तिरुपति स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय, जो पहले केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ और फिर राष्ट्रिय संस्कृत विद्यापीठ कहलाता था। यहाँ सिद्धान्त व फलित ज्योतिष, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत व द्वैत वेदान्त, साहित्य और वेदभाष्य जैसी विशेषज्ञताओं के साथ शास्त्री और आचार्य, तथा योग, शिक्षाचार्य और विद्यावारिधि (पीएच.डी.) पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
पाठ्यक्रम एवं अध्ययन क्षेत्र
- प्राक्शास्त्री
- शास्त्री (बी.ए. के समकक्ष), वेदभाष्य शास्त्री सहित
- आचार्य (संस्कृत में एम.ए. के समकक्ष): साहित्य, सिद्धान्त ज्योतिष, फलित ज्योतिष, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत व द्वैत वेदान्त, सांख्य योग
- बी.एससी. योग और एम.एससी. योग थेरेपी
- एम.ए. संस्कृत — शाब्दबोध प्रणाली एवं भाषा प्रौद्योगिकी
- शिक्षाचार्य (एम.एड. के समकक्ष)
- विद्यावारिधि (पीएच.डी.)
- विभागों में वेदभाष्य, व्याकरण, ज्योतिष एवं वास्तु और धर्मशास्त्र शामिल हैं; अंशकालिक और ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं
इतिहास
आरंभ
1957 में संस्कृत आयोग द्वारा संस्कृत संस्थानों की अनुशंसा के बाद 1961 में केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ सोसाइटी, तिरुपति का गठन हुआ। 4 जनवरी 1962 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने इसकी आधारशिला रखी। अप्रैल 1971 में विद्यापीठ राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के अधीन आया।
मानद विश्वविद्यालय
1987 में रजत जयंती के अवसर पर तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री पी. वी. नरसिंह राव ने इसे मानद विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की, और इसका नाम राष्ट्रिय संस्कृत विद्यापीठ हुआ। राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने 26 अगस्त 1989 को मानद विश्वविद्यालय का औपचारिक उद्घाटन किया, और 1991–92 सत्र से यह मानद विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करने लगा।
राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (2020)
30 अप्रैल 2020 से यह राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नाम से केंद्रीय विश्वविद्यालय बना।
